

अति प्राचीन सिद्ध पीठ श्री किल्ला मंदिर के स्वयं भू हनुमान जी के दरबार में स्थानीय भजन मंडली और मोहल्ले के भक्त गण दिनांक 19/03/2025 दिन बुधवार रंग पंचमी के अवसर पर भगवान और भक्तों के मध्य रंग गुलाल से तथा फूल पाखंडी और फाग के साथ रंग पंचमी उत्सव हर्षोल्लास के साथ मनाया गया,
रंगपंचमी के अवसर पर शाम को आरती पश्चात फाग का आयोजन हुआ जिसमे भक्त गण झूम कर नाचे तथा माहौल को रंग गुलाल फुल से सराबोर कर दिए, मंदिर के मुख्य पुजारी श्री मयंक शर्मा ने पूजा पाठ करके इस रंग पंचमी उत्सव की शुरुआत की , और देर रात तक मंदिर में भक्तों का तांता लगा रहा।
रंगपंचमी के दिन का वर्णन


चैत्र कृष्णपक्ष की पंचमी तिथि के दिन रंगपंचमी का त्योणहार बडी धूम-धाम से मनाया जाता है। रंगपंचमी को श्री पंचमी के नाम से भी जाना जाता है। होली के बाद पंचमी तिथि तक होली का त्यौहार चलता है। भारत देश के कई इलाकों में रंगपंचमी बहुत हर्ष-उल्लास एक साथ मनायी जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन भगवान श्रीकृष्ण ने श्रीराधा जी और गोपियों के साथ होली खेली थी। इस दिन राधा-कृष्ण की पूजा की जाती है।
देवताओं की होली👉 जिस प्रकार कार्तिक पूर्णिमा देवताओं की दिवाली मानी गई है उसी प्रकार रंग पंचमी को देवताओं की होली माना गया है। यह त्योहार देवताओं को समर्पित है क्योंकि हिरण्याकश्यप का वध होने के बाद सभी देवी और देवताओं ने रंगपंचमी के दिन रंगोत्सव मनाया था। यह सात्विक पूजा आराधना का दिन होता है। मान्यता है कि कुंडली के बड़े से बड़े दोष इस दिन की पूजा आराधना से ठीक हो जाते हैं।
उक्त कार्यक्रम में श्री किल्ला मंदिर लोक न्यास के समस्त पदाधिकारी सदस्य तथा बड़ी संख्या में महिला श्रद्धालु उपस्थित हो कर रंग गुलाल और फूल के साथ देवों की होली का लाभ प्राप्त हुआ ।
यह जानकारी द्रोण ताम्रकार अधिवक्ता सह सचिव श्री किल्ला मंदिर लोक न्यास के द्वारा प्रदान किया गया
