दुर्ग, स्थानीय किला मंदिर तमेरपारा में चल रही श्रीमद् भागवत कथा के पांचवें दिवस में चित्रकूट से पधारे भरत जी महाराज ने कन्हैया के पावन बाल चरित्र का चित्रण किया, उन्होंने भगवान के बाल स्वरूप का वर्णन करते हुए कहा ब्रह्मांड में सर्वश्रेष्ठ सौंदर्य परमात्मा का ही है जो निरंतर बढ़ता ही जाता है।पूतना वध की कथा सुनाते हुए उन्होंने कहा की पूतना जीव की अविद्या है वह उस समय नष्ट हो जाती है जब परमात्मा की कृपा का वरद हस्त प्राप्त होता है।



और जीव के छह प्रकार के विकार भी नष्ट हो जाते हैं तृणावर्त की कथा में उन्होंने कहा तिनके की तरह माया से प्रेरित होकर भटकता हुआ जीव ही तृणावर्त है भगवान उसका उद्धार करते हैं। माखन चोरी की लीला के बारे में उन्होंने बताया कि माखन और मिश्री जीवन के स्नेह और भक्ति की मधुरता का प्रतीक है जिसको भगवान ग्रहण करते हैं जिस दिन से यशोदा ने भगवान को उदर को दाम से बांधा उस दिन से भगवान का नाम दामोदर हो गया और बंधन युक्त होकर के भी भगवान ने माया में फंसे हुए जीवों को बंधन से मुक्त कर दिया
कालिय नाग को उन्होंने अहंकार का प्रतीक बताया जिसको भगवान अपनी चरण कृपा से शुद्ध कर देते हैं और यमुना रूपी कर्म का फल पवित्र हो जाता है। गोवर्धन को उन्होंने ज्ञान का शिखर बताते हुए कहा कि परमात्मा के चरणों में वह भी अवनत हो जाता है भगवान ने अपनी लीला के द्वारा गोवर्धन अर्थात प्रकृति को सुरक्षित रखने का संदेश दिया, प्रकृति की सुरक्षा होगी तो मानव जीवन भी सुरक्षित रहेगा महाराष्ट्र की कथा में उन्होंने जीव और ब्रह्म के मिलन की लीला का वर्णन किया अपनी इंद्रियों की रक्षा करने में सक्षम आत्मा ही गोपी है जो कृष्ण यानि परमात्मा की प्राप्ति का साधन ढूंढती है भगवान ने वृंदावन के पावन कुंजों में बुलाकर नाद ब्रह्म बांसुरी धुन के माध्यम से उन समस्त आत्माओं को निज परमात्मा स्वरुप में मिलाया। यह कार्यक्रम शबरी मानस मंडली के तत्वावधान में श्री हनुमान जी के प्राचीन स्थान किला मंदिर में किया जा रहा है जिसमें समस्त दुर्ग वासी बड़ी श्रद्धा से पहुंच रहे हैं

कथा का आनंद ले रहे हैं कार्यक्रम के मध्य में झांकियां का भी सुंदर दर्शन कराया जा रहा है।आज कथा के अंतर्गत रुक्मणी कृष्ण का पावन विवाह होगा एवं सुंदर झांकियों का भी दर्शन कराया जाएगा। उक्त श्री मद भागवत कथा का श्रवण करने के लिए दुर्ग शहर भर से श्रद्धालु गण पधार रहें हैं ।

